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रक्षाबंधन पर उतरे कुछ दिल के असल अहसास आपके हवाले
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है ये ऐसा बंधन प्यार का जिसे याद कर घर आये तू ,
कितना है उस धागे में प्यार खुद चेहरे से दिखलाये तू |
नन्ही कली फिर हुई बड़ी और अश्कों में फिर विदा हुई,
बाबुल तो यूँ ही चला गया ,कुछ चैन सुख बतलाये तू |
धागा है ये अपनी जगह , ये त्यौहार भी अपनी जगह,
तेरा हक सलामत अब भी है बाबुल से ज्यूँ इठलाये तू |
तू धागा जब जब बांधे है , तेरा अक्स माँ सा लागे है ,
मुझे बन्धनों से अगाह करे फिर स्नेह भाव समझाए तू |
ये जो रंग बिरंगी राखियाँ संग अतीत की परछाइयां ,
उन भूली बिसरी यादों संग खुशियों का रंग बिखराए तू |
___________________हर्ष महाजन
रक्षाबंधन पर उतरे कुछ दिल के असल अहसास आपके हवाले
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है ये ऐसा बंधन प्यार का जिसे याद कर घर आये तू ,
कितना है उस धागे में प्यार खुद चेहरे से दिखलाये तू |
नन्ही कली फिर हुई बड़ी और अश्कों में फिर विदा हुई,
बाबुल तो यूँ ही चला गया ,कुछ चैन सुख बतलाये तू |
धागा है ये अपनी जगह , ये त्यौहार भी अपनी जगह,
तेरा हक सलामत अब भी है बाबुल से ज्यूँ इठलाये तू |
तू धागा जब जब बांधे है , तेरा अक्स माँ सा लागे है ,
मुझे बन्धनों से अगाह करे फिर स्नेह भाव समझाए तू |
ये जो रंग बिरंगी राखियाँ संग अतीत की परछाइयां ,
उन भूली बिसरी यादों संग खुशियों का रंग बिखराए तू |
___________________हर्ष महाजन
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