Monday, August 5, 2013

तेरी खातिर मैं फलक से भी चला आऊँगा

सिर्फ एक अहसास

...

तेरी खातिर मैं फलक से भी चला आऊँगा,
तेरी आँखों के समंदर में समा जाऊँगा |
तू जो चाहे ये दुनिया भी तुझ पे नाज़ करे,
तेरे हाथों की लकीरों मैं चला आऊँगा |

_________हर्ष महजान