प्रिये अभिनेता प्राण साहब को मेरी दिली श्रद्धांजली
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जो शख्स उठ गया जहाँ से दे रहा इम्तिहान क्यूँ,
ये खुद खुदा यूँ ले के ‘प्राण’ दे रहा पहचान क्यूँ |
हस्तियाँ बहुत यहाँ परदे पे भी और ज़िन्द में भी,
पर टिक गया दिलों पे आज सिर्फ शेर-खान क्यूँ |
__________________हर्ष महाजन |
Jo shaks uth gayaa jahaaN se de rahaa imtihaan kyuN,
Ye khud khuda yuN le ke 'pran' de raha pehchan kyuN.
HastiyaN bahut yahaN parde pe bhi our zind meiN bhi,
Par tik gayaa diloN pe aaj sirf SHER-KHAAN kyuN.
_______________________Harash Mahajan
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जो शख्स उठ गया जहाँ से दे रहा इम्तिहान क्यूँ,
ये खुद खुदा यूँ ले के ‘प्राण’ दे रहा पहचान क्यूँ |
हस्तियाँ बहुत यहाँ परदे पे भी और ज़िन्द में भी,
पर टिक गया दिलों पे आज सिर्फ शेर-खान क्यूँ |
__________________हर्ष महाजन |
Jo shaks uth gayaa jahaaN se de rahaa imtihaan kyuN,
Ye khud khuda yuN le ke 'pran' de raha pehchan kyuN.
HastiyaN bahut yahaN parde pe bhi our zind meiN bhi,
Par tik gayaa diloN pe aaj sirf SHER-KHAAN kyuN.
_______________________Harash Mahajan
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