Tuesday, June 17, 2014

जिसे चाहा पर वो मिला नहीं,मुझे वक़्त से भी गिला नहीं

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जिसे चाहा पर वो मिला नहीं,मुझे वक़्त से भी गिला नहीं |
ये कैसा हुस्न-ओ-मिजाज़ था,जो अश्कों तक से हिला नहीं |
न था ज़र्ब उसको मैं पा सकूं ,न था खोने का मुझे हौंसिला,
कोई शख्स उसको मिला सके अभी तक वो शख्स मिला नहीं |

____________________हर्ष महाजन

Monday, June 16, 2014

यूँ दिल-ओ-जहाँ से गुज़र गया

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यूँ दिल-ओ-जहाँ से.....गुज़र गया,
वो ख्यालों से ही..........उतर गया |
था जिस्म-ओ-जाँ की तलब में जो ,
अब बातों से भी........ज़िकर गया |



________हर्ष महाजन

Saturday, June 14, 2014

मिले जो तुम तो ये पर्दा ज़हन से सरका है


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मिले जो तुम तो ये पर्दा...ज़हन से सरका है,
लगा ज्यूँ सदियों बाद ये दिल मेरा धड़का है |
संभालो बाँध शहर के....लहर से टूट न जाएँ,
कि मेरी आँखों से अब तनहा प्यार छलका है |

___________हर्ष महाजन


Mile jo tum to ye parda................zahan se sarka hai,
lagaa jyuN sadiyoN baad......ye dil mera dhadka hai.
Sambhalo baandh shahar ke laher se toot na jaayeN,
Ki meri aankhoN se.......ab tanhaa pyaar chhalka hai.

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Friday, June 13, 2014

लोग तो खुशियाँ और.... इमदाद बाँटते हैं

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लोग तो खुशियाँ और.... इमदाद बाँटते हैं,
हम तो कवि हैं....गम में भी दाद बाँटते हैं |
ज़रूरी नहीं कि......मौत पर रोया ही जाए,
हम ग़ज़लों में अश्कों का सैलाब बाँटते हैं |
________हर्ष महाजन

Thursday, June 12, 2014

गर उन्हें याद नहीं ख़त में क्यूँ ‘हम’ लिखते हैं


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गर उन्हें इल्म नहीं, ख़त में क्यूँ, ‘हम’ लिखते हैं,
वो यूँ  कहते हैं कि....मज़मून-ए-गम लिखते हैं |
उनसे दूरी का उन्हें........गम नहीं, कहा उसने,
बस ज़रा ख़त में उन्हें, आँख हैं नम, लिखते हैं |

______________हर्ष महाजन  

Wednesday, June 11, 2014

छोटी सी ये रियासत.....दोस्तों की महफ़िल


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छोटी सी ये रियासत.....दोस्तों की महफ़िल,
दोस्तों की अमानत......दोस्तों की महफ़िल |
देखकर रखना कदम सल्तनत आम नहीं ये ,
दोस्त ही हैं ज़मानत.....दोस्तों की महफ़िल |


____________हर्ष महाजन


Chhoti sii ye riyaasat.......... dostoN kii mehfil,
DostoN kii amaanat.............dostoN kii mehfil.
Dekhkar rakhna kadam saltnat aam nahiN ye,
Dost hi hai zamanat...........dostoN kii mehfil.

________________Harash Mahajan

Monday, June 9, 2014

खुदाया तेरे जहाँ में ये हल नहीं मिलता

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खुदाया तेरे जहाँ में.............ये हल नहीं मिलता,
जो पल गुज़र गया ज़िन्द से वो पल नहीं मिलता |
जो बेटे अश्क बहा कर के..........माँ को छलते हैं,
पर माँ के अश्कों में कोई....भी छल नहीं मिलता |

_____________हर्ष महाजन

दिल से निकलें जो भी अहसास....मेरी ग़ज़लों में हैं

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दिल से निकलें जो भी अहसास....मेरी ग़ज़लों में हैं,
मेरी ख्वाहिशें मेरे जज़्बात..........मेरी ग़ज़लों में हैं |

जो भी खुशियाँ और गम भी मुझे ज़िन्द में थे मिले,,
सब हकीकत में मेरे राज़............मेरी ग़ज़लों में हैं |

इतना तडपा हूँ मैं लेकिन ये आखें.....तर नहीं होती ,
जो कुछ गुजरा सभी अल्फाज़......मेरी ग़ज़लों में
हैं |

काश अब दिल की सदाओं में, असर इतना हो जाए,
किसको हमसफ़र के मिलें ताज...मेरी ग़ज़लों में
हैं |

जिगर होता है छलनी आँख से जब सपने छिन जाएँ,
जो रोये थे दिलों के साज़................मेरी ग़ज़लों में
हैं |

________________हर्ष महाजन

Sunday, June 8, 2014

तेरी जुल्फों की अदाओं ने, मुझे गूंध लिया

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तेरी जुल्फों की अदाओं ने, मुझे गूंध लिया,
तूने लहरा के इन्हें फिर से जहां लूट लिया |
जब तू इतरा के इन्हें...करती चेहरे से जुदा,
मैं धरातल पे गिरा हूँ ज्यूँ है इक घूँट लिया | 


._____________हर्ष महाजन

वो शाम और वो जुल्फें मुझे खूब याद आयें

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वो शाम और वो जुल्फें, मुझे खूब याद आयें,
नींदों में है खलिश सी कह दो की बाज़ आयें |
मेरे लफ्ज़ मेरी ग़ज़लें...अब हुस्न से हैं तारी,
कर तू सिंगार इतना......देने को ताज आयें |

_____________हर्ष महाजन

थी उसकी रंजिशें तो हमने यार छोड़ दिया

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थी उसकी रंजिशें तो.....हमने यार छोड़ दिया,
गरज भी उसकी मगर हमने प्यार छोड़ दिया |

गज़ब की थीं नसीहतें.....जो तनहा कर गयीं,
जिसे था छोड़ा उसने.......ऐतबार छोड़ दिया |

गुमाँ था ये की शख्स, वो खुदा से कम न था,
अना भी इस कदर, खुदा ने द्वार छोड़ दिया |

न जाने कैसे ये गुनाह........हमने कर लिया,
हौले-हौले तनहा कर........बीमार छोड़ दिया |

_____________हर्ष महाजन

Friday, June 6, 2014

ये नसीबों का है सिलसिला...किसी कब्र पर बने ताजमहल

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ये नसीबों का है सिलसिला...किसी कब्र पर बने ताजमहल,
कई बदनसीब इस जहाँ में हैं न दफ़न मिले न मिले कफन |
______________हर्ष महाजन

Wednesday, June 4, 2014

बिखरे रिश्तों की दरारें अब मिटाऊं कैसे

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बिखरे रिश्तों की दरारें अब मिटाऊं कैसे,
मोम के रिश्ते.....गर्मियों से बचाऊँ कैसे |
इतना घुला है ज़हर उसके जहन में 'हर्ष',
अपने हाथों की लकीरें उसे दिखाऊँ कैसे |

_________हर्ष महाजन

कितनी यादें कितने धागे कितने रिश्ते तोड़े

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कितनी यादें कितने धागे कितने रिश्ते तोड़े,
बहुत शातिर है ज़हर की इतनी किश्तें छोड़े |


___________हर्ष महाजन

चारों पहर उसकी तस्वीरों में हर्ज़ किया करता हूँ

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चारों पहर उसकी...........तस्वीरों में हर्ज़ किया करता हूँ,
फिर वरक वरक उसे तहरीरों में.......दर्ज किया करता हूँ |
किस तरह खारिज होंगे उसके ख्वाब, अब मेरी आँखों से,
अब दर्द उसका अपनी...तकदीरों में मर्ज़ किया करता हूँ |


_________________हर्ष महाजन

Tuesday, June 3, 2014

इस इब्तेदायी माहौल में,मेरा सियासतों से सवाल

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इस इब्तेदायी माहौल में...........मेरा सियासतों से सवाल है,
क्या गुज़र रही है आवाम पर, क्या उन्हें भी इसका मलाल है |
कुछ ख्वाहीशें थीं,कुछ खुशियाँ भी,कुछ वलवले कुछ वादे भी,
बस सब हवा सा गुज़र गया.......क्या ये काफिला बदहाल है |



___________________हर्ष महाजन

कितना बदनसीब सफ़र ज़िन्दगी की राहों में

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कितना बदनसीब सफ़र ज़िन्दगी की राहों में,
जो भी चाहा था हुआ.........दरकिनार बातों में ।
जाने क्यों तोड़ दिया....रिश्ता गैर की खातिर,
जिसके दम पर थे चले....कर चले सलाखों में ।

-------------हर्ष महाजन

Sunday, June 1, 2014

कैसे शिकवे हैं तेरे कैसे इरादे तेरे

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कैसे शिकवे हैं तेरे...........कैसे इरादे तेरे ,
मेरी शायरी है यहाँ........और हैं वादे तेरे |
कैसा हूँ अपना मैं गैरों सा यहाँ लगता हूँ,
कौन दुश्मन है यहाँ.......कौन बतादे तेरे | 

___________हर्ष महाजन

इस कदर हमने किया...तुझसे प्यार ऐ साकी

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इस कदर हमने किया...तुझसे प्यार ऐ साकी,
जिस तरह गम में चलें जाम-ए-यार ऐ साकी |
जब तलक होता नहीं दिल की चाहत का ज़िक्र,
किस तरह उबले गा दिल का गुबार ऐ साकी |

______________हर्ष महाजन

गर तुम हो तो मेरी आहों में नज़र आओगी

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गर तुम हो तो मेरी....आहों में नज़र आओगी,
मेरी आँखों से बन के....अश्क उतर आओगी ।
बेवफायी का सबब.....जब भी नज़र आएगा,
मेरी ग़ज़लों में खुद ही बन के असर आओगी ।

---------------हर्ष महाजन