Wednesday, August 27, 2014

... मेरा दोस्त नहीं दुश्मन नहीं इसी बात का तो मलाल है


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मेरा दोस्त नहीं दुश्मन नहीं इसी बात का तो मलाल है,
क्यूँ दिल पे गुजरी है मेरे, मेरा खुद से इतना सवाल है | 


__________________हर्ष महाजन
 

Monday, August 25, 2014

गम जुदाई का था हम उम्र-भर रोते रहे

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गम जुदाई का था हम......उम्र-भर रोते रहे,
बे-वफ़ा निकले वो......बदनाम हम होते रहे |
अनकहा दिल में
रहा ,मुझसे कभी पूछे कोई,
दाग दिल पे था मगर, आईना हम धोते रहे | 

_______________हर्ष महाजन

मैं था दीवार पे शीशे में था तस्वीर जड़ा

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मैं था दीवार पे शीशे में.............था तस्वीर जड़ा,
जिसे चाहा था वो हैराँ सा........ज़मीं पर था खड़ा |
हाल-ए-दिल के थे कई फासले......जो तय न हुए,
फिर भी हालात-ए-भंवर से था मैं फिर बहुत लड़ा |

_______________हर्ष महाजन

वो कफन बेच के पाले है यहाँ अपना ये बदन

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वो कफन बेच के पाले है.......यहाँ अपना ये बदन,
अब खरीदार वही आएगा....जिसका उजड़ा वतन |
ऐ खुदा ऐसा कुछ करना......तू कभी उसपे करम,
गर दुआ मांगे भी उजड़े न फिर उसका भी चमन |

____________________हर्ष महाजन

Sunday, August 24, 2014

:एक क्षणिका:

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:एक क्षणिका:
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जिस पल
उसने
आँचल से
मुझे उतार दिया |
यूँ लगा !!
ज्यूँ ............
भर हुंकार
खुदा ने
वापिस पुकार लिया !!

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____हर्ष महाजन

क्या कहूँ उनको जो वो गर्म धुंआ करते हैं

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क्या कहूँ उनको जो वो गर्म धुंआ करते हैं,
आके मंजिल के करीब इश्क रवां करते हैं |
जब कभी उठे है आँखों में समंदर सा भंवर,
सूखे अधरों पे खिजाँओं को फिज़ां करते हैं |

___________हर्ष महाजन

जब तसव्वुर में तुम बन ख्वाब इधर आओगी

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जब तसव्वुर में तुम बन ख्वाब इधर आओगी,
है यकीं मुझको मेरी....बन के जिगर आओगी |
गर यूँ भूले से कभी.....गैरों का चर्चा भी किया,
मेरी आँखों से तुम....बन अश्क उतर आओगी |

____________हर्ष महाजन

Friday, August 22, 2014

कतरा-कतरा ढूंढ-ढूढ़ रिश्ते संजोया किये था मैं

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कतरा-कतरा ढूंढ कर.....रिश्ते संजोया किये था मैं,
रफ्ता-रफ्ता कब्र में खुद......कांटे बोया किये था मैं |

__________________हर्ष महाजन

उनकी बे-रुखी ने मुझे इस कदर मशहूर कर दिया

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उनकी बे-रुखी ने मुझे इस कदर मशहूर कर दिया,
कि वफ़ा करने वालों से.....परेशान होने लगा हूँ मैं |

____________________हर्ष महाजन

हज़ारों मर्तबा परखा है मैंने हुस्न को सौगवारों में

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हज़ारों मर्तबा परखा है मैंने हुस्न को सौगवारों में ,
मगर मेरी मोहब्बत का हासिल....बस तू ही तो है |


____________________हर्ष महाजन

प्यार बांटने का वक़्त अब निकल चुका है 'हर्ष',

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प्यार बांटने का वक़्त अब........निकल चुका है 'हर्ष',
नफरतों का सिलसिला आजकल खूब रूआब पर है |
____________________हर्ष महाजन

Tuesday, August 19, 2014

लोग जज्बों की....यहाँ कदर कहाँ करते हैं

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लोग जज्बों की....यहाँ कदर कहाँ करते हैं,
हम भी फिर दर्द कहाँ अपना जुबां करते हैं |
रूखापन उनका कहीं ज़ख्म न फानी करदे,
इन गहरे ज़ख्मों से हम उम्र धुंआ करते हैं |

_______________हर्ष महाजन

Monday, August 18, 2014

कुछ पुराने मेरे ख़त पढ़ के रोई जाती है

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कुछ पुराने मेरे ख़त.......पढ़ के रोई जाती है,
कम्बखत याद मुझे भी.....तो बहुत आती है |
उसके इल्जाम यूँ दिल पे पड़े खंजर से मगर,
है शमा ज़िंदा........दिया मैं हूँ तो वो बाती है | 

____________हर्ष महाजन

जिसने झेलें हैं वतन के लिए सरहद पे सितम

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जिसने झेलें हैं वतन के लिए सरहद पे सितम,
अब तलक ज़ख्म वो.....ओरों के सिये जाते हैं |
अब सियासत भी खडी..उनपे दीवारों की तरह,
पाँव किरदारों पे रख........तगमें लिए जाते हैं |

___________________हर्ष महाजन

न ही किरदार से तेरे मुझे नफरत है कोई



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न ही किरदार से तेरे मुझे...कोई नफरत है,
और न शक है कोई और न मेरी फितरत है |
हमने देखे हैं वो, मंज़र कई..रूठ जाने बाद,
अब न तस्वीर तेरी....बिगड़े मेरी हसरत है |

_______________हर्ष महाजन

Sunday, August 17, 2014

भूली बिसरी तेरी बातों को भुलाऊँ कैसे



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भूली बिसरी तेरी बातों को भुलाऊँ कैसे,
तेरी गलियों को अब छोड़ मैं जाऊँ कैसे |
इन फिजाओं में जो महके है ये इश्क तेरा,

मुझको अब लोग ये पूछें तो बताऊँ कैसे |

_______________हर्ष महाजन

मुझको बता दिल छलने वाले खो के मुझे क्यूँ रोया है

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मुझको बता दिल छलने वाले.......खो के मुझे क्यूँ रोया है,
हँसने वाले अब क्या जाने.............मुक़द्दर उसका सोया है |
फूल क्या जाने किस्मत अपनी चिता मिले या गला मिले,
नाकामी का सबब ही है ये..............पाकर जिसने खोया है | 

_______________________हर्ष महाजन

Saturday, August 16, 2014

कितनी तकलीफ में हो इतना अहसास मुझे

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कितनी तकलीफ में हो.....इतना अहसास मुझे,
इश्क, दिल्लगी-ओ-वफ़ा आती न पर रास मुझे |
बीते हैं शाम-ओ-सहर........ज़ख्म सहलाते हुए,
अब तो यूँ भी न रहा......खुद पर विश्वास मुझे |

______________हर्ष महाजन

Friday, August 15, 2014

ये बदलियाँ जो छोटी-छोटी, ज़िन्द पे छाई हैं

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ये बदलियाँ जो छोटी-छोटी, ज़िन्द पे छाई हैं,
हैं कुछ तो गम ये....और कुछ मेरी तन्हाई है |
मिले जो इतने निशाँ..खुद सितम बतलायेंगे,
नहीं भूला उनको आज..जिनकी रहनुमाई है | 

______________हर्ष महाजन

Wednesday, August 13, 2014

उसकी बेवफाई बता कितनी असरदार निकली


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उसकी बेवफाई बता..कितनी असरदार निकली,
उसको समझाया बहुत पर वो खबरदार निकली |

अश्क आँखों से सरकते हैं....ज्यूँ अब रूह सरके,
वो यूँ खेली ज्यूँ....मोहब्बत की खरीदार निकली |

हम तो महफ़िलों में उसे...इश्की वफ़ा कहते रहे,
पर मेरी अश्क-ए-लहर उस से वफादार निकली |

मिली वो ज़िंदगी में....इक था नशा छाने लगा,
हुई थी बे-मज़ा फ़क़त जो वो किरदार निकली |

मैंने छोडी जो दुनिया लोगों ने समझाया बहुत,
मेरे ज़ख्मों की लहर दिल पे असरदार निकली |

______________हर्ष महाजन