Saturday, August 16, 2014

कितनी तकलीफ में हो इतना अहसास मुझे

...

कितनी तकलीफ में हो.....इतना अहसास मुझे,
इश्क, दिल्लगी-ओ-वफ़ा आती न पर रास मुझे |
बीते हैं शाम-ओ-सहर........ज़ख्म सहलाते हुए,
अब तो यूँ भी न रहा......खुद पर विश्वास मुझे |

______________हर्ष महाजन

No comments:

Post a Comment