Sunday, August 17, 2014

मुझको बता दिल छलने वाले खो के मुझे क्यूँ रोया है

...

मुझको बता दिल छलने वाले.......खो के मुझे क्यूँ रोया है,
हँसने वाले अब क्या जाने.............मुक़द्दर उसका सोया है |
फूल क्या जाने किस्मत अपनी चिता मिले या गला मिले,
नाकामी का सबब ही है ये..............पाकर जिसने खोया है | 

_______________________हर्ष महाजन

Saturday, August 16, 2014

कितनी तकलीफ में हो इतना अहसास मुझे

...

कितनी तकलीफ में हो.....इतना अहसास मुझे,
इश्क, दिल्लगी-ओ-वफ़ा आती न पर रास मुझे |
बीते हैं शाम-ओ-सहर........ज़ख्म सहलाते हुए,
अब तो यूँ भी न रहा......खुद पर विश्वास मुझे |

______________हर्ष महाजन

Friday, August 15, 2014

ये बदलियाँ जो छोटी-छोटी, ज़िन्द पे छाई हैं

...

ये बदलियाँ जो छोटी-छोटी, ज़िन्द पे छाई हैं,
हैं कुछ तो गम ये....और कुछ मेरी तन्हाई है |
मिले जो इतने निशाँ..खुद सितम बतलायेंगे,
नहीं भूला उनको आज..जिनकी रहनुमाई है | 

______________हर्ष महाजन

Wednesday, August 13, 2014

उसकी बेवफाई बता कितनी असरदार निकली


...

उसकी बेवफाई बता..कितनी असरदार निकली,
उसको समझाया बहुत पर वो खबरदार निकली |

अश्क आँखों से सरकते हैं....ज्यूँ अब रूह सरके,
वो यूँ खेली ज्यूँ....मोहब्बत की खरीदार निकली |

हम तो महफ़िलों में उसे...इश्की वफ़ा कहते रहे,
पर मेरी अश्क-ए-लहर उस से वफादार निकली |

मिली वो ज़िंदगी में....इक था नशा छाने लगा,
हुई थी बे-मज़ा फ़क़त जो वो किरदार निकली |

मैंने छोडी जो दुनिया लोगों ने समझाया बहुत,
मेरे ज़ख्मों की लहर दिल पे असरदार निकली |

______________हर्ष महाजन

यूँ तो अश्कों को मेरी आँख से जाना होगा



...

यूँ तो अश्कों को मेरी....आँख से जाना होगा,
इश्क गर कश्ती है समंदर में तो आना होगा |
जाने क्यूँ कहता है...पत्थर मुझे चाहने वाला,
मैं तो किस्मत ही कहूँ...उसको बताना होगा |
 

___________हर्ष महाजन

Tuesday, August 12, 2014

जब मिलें फुरसतें कुछ अपनी कहानी लिखना



...

जब मिलें फुरसतें कुछ......अपनी कहानी लिखना,
होंगे अफ़साने नए................बातें पुरानी लिखना |
फिर किताबों में तेरा..........फूल छुपाने का हुनर,
जब भी लिखना उसे भर-भर के जवानी लिखना |

_______________हर्ष महाजन

Monday, August 11, 2014

ऎसी नागिन की तरह डसने को तैयार है वो

...

ऎसी नागिन की तरह..डसने को तैयार है वो,
चाहे अब जो भी है बस मेरी गजब यार है वो |
मेरी राहों में कितने शूल....उसने छोड़े मगर,
कभी न पीठ पर दुश्मन सा....करे वार है वो |

__________________हर्ष महाजन

Sunday, August 10, 2014

दिल हुआ जाता है मजबूर तुझ से बात करे

...

दिल हुआ जाता है मजबूर..........तुझ से बात करे,
बात बस इतनी कि तू..........खुद ये शुरूआत करे |

गुज़रे हैं बाद तिरे लोग.............बहुत दिल से मेरे ,
पर कोई तुझ सा नहीं............रह-गुज़र साथ करे |

जाने क्यूँ आँखों में हर पल........रहे रौशन-रौशन,
अब शिकायत है ये कुदरत से......क्यूँ वो रात करे |

अब तो लरजे है तसव्वुर में........बदन तेरा सनम,
और जज़्बात सारी रात...........अब सवालात करे |

दिन थे क्या शहर-ए-बदन तक की खबर रखते थे,
अब तो मुश्किल हुआ इतना......कि मुलाकात करें |
______________हर्ष महाजन

Friday, August 8, 2014

मैंने माना नहीं कमतर था मुकद्दर मेरा

...

मैंने माना नहीं....कमतर था मुकद्दर मेरा ,
पर मेरी ग़ज़लों में....सबने ही जुदाई देखी |
अपने किरदार की....औकात जो देखी मैंने,
अक्स देखा था जो आईने में तबाही देखी |

________________हर्ष महाजन

Wednesday, August 6, 2014

जब भी लिखना अच्छा लिखना

...


जब भी लिखना अच्छा लिखना,
बूढा लगे तब भी बच्चा लिखना |
दुआ सलाम सभी से कायम रहे,
दिल का हिसाब सच्चा लिखना |


_______हर्ष महाजन

Sunday, August 3, 2014

यूँ मोहब्बत तो मुझे.....दिल पे गुनाह लगता



...

यूँ मोहब्बत तो मुझे दिल पे गुनाह लगता है,
कम्बखत दिल है ये...उसकी ही पनाह लगता है |
नाम लिख लो इक मोहब्बत के दीवानों में कहीं,
दिल तो ज़ख़्मी है मगर उसपे फनाह लगता है |

_____________हर्ष महाजन

मुझको हर मोड़ पर सदमा ही दिया है जालिम

...

मुझको हर मोड़ पर सदमा ही दिया है जालिम,
तूने हर राह पर इम्तिहान ही लिया है जालिम |
दर्द-ए-शायरी में भुलाता ही रहा..तुझको मगर,
ज़ख्म कहने लगे....क्या तूने किया है जालिम |

_____________हर्ष महाजन

Saturday, August 2, 2014

ये मोहब्बतें भी अजीब हैं रूठे कोई टूटे को

...

ये मोहब्बतें भी अजीब हैं रूठे कोई टूटे कोई,
गर हो न प्यार नसीब में गूंथे कोई लूटे कोई |

____________हर्ष महाजन

Friday, August 1, 2014

किस तरह तलाशा उसने मेरे दिल में आशियाँ

...

किस तरह तलाशा उसने मेरे दिल में आशियाँ,
जहाँ सदियों से खुद...इक दरीचां ढूंढ रहा हूँ मैं |


____________________हर्ष महाजन

Wednesday, July 30, 2014

मेरी धड़कन को दुनिया मनाती रही

...

मेरी धड़कन को दुनिया.....मनाती रही,
चुप थी बे-दर्दी........हम को रुलाती रही |

दिल था टूटा मगर......मैं न टूटा कभी ,
बे-वफ़ा थी जो नज़रें.........चुराती रही |

इक खलिश थी मुझे,उसको भी रंज था,
जाने फिर क्यूँ वो...मातम मनाती रही |

बात जो कुछ भी थी....बीच उसके मेरे,
बे-वफ़ा गैरों को क्यूँ.........बताती रही |

मैं तो मायूस था.....वो खफा थी मगर ,
मैं भुलाता रहा.......वो याद आती रही |

___________हर्ष महाजन

Tuesday, July 29, 2014

ज़िक्र खुद अपने गुनाहों पे किया करता हूँ

...

ज़िक्र खुद अपने गुनाहों पे किया करता हूँ,
कुछ सवालात सजाओं पे किया करता हूँ |

गम के इस पार जो हस्ती बनायी थी कभी,
दर्द-ए-इज़हार खताओं पे किया करता हूँ |

आदत-ए-इश्क में ख़ाक-ए-जिगर देख लिया,
बे-जुबां शायरी अदाओं पे किया करता हूँ |

उसके इंतज़ार में अब इतनी सजा पायी है,
दिल्लगी आजकल हवाओं पे किया करता हूँ |

मेरी तन्हायी का दिल में खलल इतना हुआ,
अब तो हर ज़िक्र बे-वफाओं पे किया करता हूँ |

___________हर्ष महाजन

Tuesday, July 22, 2014

इखलास-ए-इश्क में क्या करें, आओ मिल के दुनिया ही छोड़ चलें



...

इखलास-ए-इश्क में क्या करें, आओ मिल के दुनिया ही छोड़ चलें,
न हो पूरा फ़र्ज़ गर उम्मीद का, तो ख्याल-ए-दुनिया ही मोड़ चलें |
यूँ तो हर तरफ बे-रुखी सी है.............धोखा फरेब खामोशी भी है,
क्यूँ न बे-जुबां इन बुतों से हम, खुशी-गम का रिश्ता ही तोड़ चलें |  

________________________हर्ष महाजन