Tuesday, June 24, 2014

खुद पे ज़बर यूँ करके मुहब्बत का दम मैं भरता हूँ


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खुद पे ज़बर यूँ करके मुहब्बत का दम मैं भरता हूँ,
कैसी बेबसी मेरी.........बे-वफ़ा में रंग मैं भरता हूँ |
लाइलाज दर्द-ए-इश्क है....लाइलाज इसका है जुनूं,
तनहा सी ज़िंदगी को अब...अश्कों संग मैं भरता हूँ |

________________हर्ष महाजन




Khud pe zabar yuN karke muhabbat ka dam maiN bharta huN,
Kaisi hai bebasi merii.....be-wafa meiN rang maiN bharta huN.
La-ilaaj dard-e-ishq ha......................... la-ilaaj iska hai junooN,
Tanha sii zindagii ko ab.............ashqoN sang maiN bharta huN.