Monday, June 9, 2014

दिल से निकलें जो भी अहसास....मेरी ग़ज़लों में हैं

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दिल से निकलें जो भी अहसास....मेरी ग़ज़लों में हैं,
मेरी ख्वाहिशें मेरे जज़्बात..........मेरी ग़ज़लों में हैं |

जो भी खुशियाँ और गम भी मुझे ज़िन्द में थे मिले,,
सब हकीकत में मेरे राज़............मेरी ग़ज़लों में हैं |

इतना तडपा हूँ मैं लेकिन ये आखें.....तर नहीं होती ,
जो कुछ गुजरा सभी अल्फाज़......मेरी ग़ज़लों में
हैं |

काश अब दिल की सदाओं में, असर इतना हो जाए,
किसको हमसफ़र के मिलें ताज...मेरी ग़ज़लों में
हैं |

जिगर होता है छलनी आँख से जब सपने छिन जाएँ,
जो रोये थे दिलों के साज़................मेरी ग़ज़लों में
हैं |

________________हर्ष महाजन