Friday, May 29, 2020

हिचकियाँ


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यूँ न मजबूर करो
मुझे
अपनी हिचकियों से इस कदर,
मुझे भी तो
ख्याल है
तेरे बे-सब्र जज़्बे का ।

----हर्ष महाजन

Thursday, May 28, 2020

आइये समंदर को बदल डालें

...

आइये आज समंदर को बदल डालें ,
मेरे  कुछ शेर हैं उनमें वज़न डालें |
मगर बदलूं कैसे बदनसीब मुक़द्दर, 
चलो हाथ की लकीरों में खलल डालें |

_________हर्ष महाजन

मेरा वज़ूद

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ये आईना नहीं,
 मेरे वज़ूद का सबूत है,

वरना कभी कोई, 
मेरा पैरवीकार न होता ।

....हर्ष महाजन

Sunday, May 10, 2020

यादों का दीप जला ये दिल में दर्द उठा

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यादों का दीप जला  ये दिल में दर्द उठा
बड़ी मुद्दत से मुझे माँ तेरा आँचल न मिला |

यादों का दीप जला..........

तेरे हाथों की महक म अब भी आती है सदा,
तेरे मुखड़े की झलक , आये सपनों में सदा,
न छिनना ये सिलसिला, मिले है सकून बड़ा,
बड़ी मुद्दत से मुझे माँ तेरा आँचल न मिला |

यादों का दीप जला..........

बचपन के दिन वो मेरे, जो बीते संग माँ तेरे,
थे दिन तेरे गीतों भरे बसे जो अंग अंग नेरे,
न भूलूँ उनको सदा है उनमें जादू भरा
बड़ी मुद्दत से मुझे माँ तेरा आँचल न मिला |

यादों का दीप जला..........

***
written in 1980's

Wednesday, April 8, 2020

नुक़्ता क्या होता है ?



नुक़्ता

ग़ज़ल कहते वक़्त जब हम शब्दावली का प्रयोग करते हैं तो अक्सर हम उर्दू के लफ़्ज़ भी इस्तेमाल करते हैं । लेकिन लफ्ज़ के ग़लत इस्तेमाल से ग़ज़ल के अर्थ का अनर्थ हो जाता है ।

नुक़्ता किस तरह इसे लिखने में प्रयोग करते हैं ।

नुक़्ता वैसे तो ये एक अरबी भाषा का लफ्ज़  होता है, जिसका सामान्य भाषा में मतलब बिंदु होता है। इसकी पहचान बहुत ही आसान है। क्योंकि ये किसी अक्षर के नीचे लगा बिंदु होता है। जैसे ज़, क़, ख़ आदि। अगर ये किसी अक्षर के साथ लग जाता है और उससे किसी शब्द का निर्माण होता है, तो उसका अर्थ सामान्य शब्द से यानी बिना बिंदु वाले शब्द से अलग हो जाता है।

उदाहरण के लिए जमाना शब्द में नुक़्ता का प्रयोग नहीं हुआ है और यहां इसका अर्थ जमा देने से है। ठीक इसके विपरीत अगर हम ज के नुक्ता लगा दें जैसे ज़ और अब इससे किसी शब्द का निर्माण करे जो पहले बताए शब्द की तरह हो, तो उसका अर्थ बदल जाता है। जैसे - ज़माना। अब यहां इस शब्द का अर्थ जमा देने से नहीं बल्कि दुनिया होता है।
इसी तरह विशेष रूप से 5 ऐसे व्यंजन हैं जिन्हें नुक़्ता के आधार पर प्रयोग किया जाता है। ये 5 शब्द हैं
क, ख, ग, ज, और फ है।

 नीचे  कुछ ऐसे ही मिलते जुलते शब्द देख सकते हैं। साथ ही हम ये भी देखेंगे कि इनका गलत प्रयोग करने पर इनके अर्थ में कितना बड़ा अंतर आ जाता है।

आइये देखते हैं नुक़्ता वाले और बिना नुक्ता वाले शब्द । जिन पर स्टार लगा है वो नुक़्ता वाले शब्द हैं ।

ज़माना* - दुनिया
जमाना - ठोस करना
राज़* - रहस्य
राज - शासन
खाना - भोजन
ख़ाना* - जगह
खुदा - खोदने से
ख़ुदा* - परमात्मा
सज़ा* - दंड
सजा - सजावट से
क़मर* - चन्द्रमा
कमर - शरीर का हिस्सा
क़िताब*=कुर्ते आदि का गला
किताब=पुस्तक
ख़सरा*=हिसाब का कच्चा चिट्ठा
खसरा=एक तरह की बीमारी
ग़ुल*=शोर
गुल=फूल
ज़रा*=थोड़ा, कम
जरा=वृद्धावस्था, बुढ़ापा
तेज़*=तीव्र, फुर्तीला
तेज=आभा, दीप्ती, कांति
नुक़्ता*=बिंदु
नुक्ता=सूक्ष्म, बारीक़, ऐब
हैज़ा*=दस्त
हैजा=युद्ध
बाग़*=उपवन
बाग=बागडोर

ऐसे बहुत से शब्द और भी हैं जिनका ग़ज़ल कहते वक़्त तो मालूम नहीं चलता जब उन्हें कलम बध्द किया जाता है तो ध्यान रखना बहुत ज़रूरी होता है ।

मिलेंगे किसी और टॉपिक के साथ ।
धन्यवाद
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नॉट:-
 नुक़्ता हिंदी या देवनागरी या  गुरमुखी और अन्य ब्राह्मी परिवार की लिपियों में भी किसी व्यंजन अक्षर के नीचे लगाए जाने वाले बिंदु को कहते हैं। इस से उस अक्षर का उच्चारण परिवर्तित होकर किसी अन्य व्यंजन का हो जाता है।

जैसे -

'ज' के नीचे नुक्ता लगाने से 'ज़' बन जाता है और 'ड' के नीचे नुक्ता लगाने से 'ड़' बन जाता है।

नुक़्ते ऐसे व्यंजनों को बनाने के लिए प्रयोग होते हैं, जो पहले से मूल लिपि में न हों, जैसे कि 'ढ़' मूल देवनागरी वर्णमाला में नहीं था और न ही यह संस्कृत में पाया जाता है।

नुक़्ता का प्रयोग किन वर्णों में किया जाता है
उर्दू, अरबी, फ़ारसी भाषा से हिंदी भाषा में आए क, ख, ग, ज, फ वर्णों को अलग से बताने के लिए नुक़्ता का प्रयोग किया जाता है क्योंकि नुक़्ता के बिना इन भाषाओं से लिए गए शब्दों को हिंदी में सही से उच्चारित नहीं किया जा सकता। नुक़्ता के प्रयोग से उस वर्ण के उच्चारण पर अधिक दबाव आ जाता है।
जैसे -

हिंदी में 'खुदा' का अर्थ होता है - 'खुदी हुई ज़मीन' और नुक़्ता लग जाने से 'ख़ुदा' का अर्थ 'भगवान्' हो जाता है।

हिंदी में 'गज' का अर्थ होता है - 'हाथी' और नुक़्ता लग जाने से 'गज़' का अर्थ 'नाप' हो जाता है।

कुछ नुक़्ता वाले शब्द
कमज़ोर, तूफ़ान, ज़रूर, इस्तीफ़ा, ज़ुल्म, फ़तवा, मज़दूर, ताज़ा, फ़कीर, फ़रमान, इज़्ज़त आदि।

क, ख, ग में नुक़्ता का प्रयोग हिंदी भाषा में अनिवार्य नहीं है परन्तु ‘ज़’ और ‘फ़’ में नुक़्ता लगाना आवश्यक है।

Tuesday, April 7, 2020

गर्दिश ए ज़िन्दगी ने था बदला मुझे

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गर्दिश ए ज़िन्दगी ने था बदला मुझे,
लोग कहने लगे नीम पगला मुझे ।
ठोकरों से नया इक हुआ तजरिबा,
हर क़हर रोशनी दे के निकला मुझे ।

------------हर्ष महाजन 'हर्ष'

होंसला ख़ौफ़ खाने लगा है

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होंसला ख़ौफ़ खाने लगा है,
रुख हवा का बताने लगा है ।
पूछ लेना निकलने से पहले, 
वक़्त यूँ भी डराने लगा है ।

----------हर्ष महाजन 'हर्ष'

Monday, April 6, 2020

शब्द गलत वज़्न में बाँधना


शब्द को अगर गलत वज़्न में ले लिया जाए यानि किसी शब्द का उच्चारण गलत कर लेते हैं तो इससे बहर का दोष पैदा हो जाता है ।
कुछ शब्द जैसे:-
1)अमन-12 शुद्ध,,-अम्न-21
2)तजुर्बा-122,
शुद्ध- तज़रिबा-212
3)तुम्हारा-222
शुद्ध-तु म्हारा-122
4) मोहब्बत-222
शुद्ध- मुहब्बत-122
5)चेहरा-212
शुद्ध-चहरा-22

Tuesday, December 4, 2018

कितनी यादें छिपी हैं उनकी खामोश आंखों में

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कितनी यादें छिपी हैं उनकी खामोश आंखों में,
डर लगता है कहीं उफ़क न पड़ें मेरे आने से ।

--------------हर्ष महजन

Monday, December 3, 2018

करता रहा उम्र-भर नफरत जिस शख्स से

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करता रहा उम्र-भर नफरत जिस शख्स से,
जुदा हुआ तो कतरा इक मेरी आँखों में था,

यत्न तो किये थे मैने कि उसे भूल ही जाऊँ, 
मगर क्या करूँ वो दिल की सलाख़ों में था ।

----------------हर्ष महाजन

Tuesday, October 2, 2018

जावेद अख्तर जी

फिल्मी जगत की कुछ कही अनकही बातें ।
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इस सीरीज में हम बात करेंगे फिल्मी जगत में घटी कुछ ऐसी घटनाओं की जिनकी जानकारी सिर्फ कुछ विरले ही लोगों के पास होगी । औऱ जहां तक उन हस्तियों की बात है जिनके बारे में घटनाओं का ज़िक्र है संभवत: वही होंगे जिनको मैं अभी तलक पसंद करता आया हूँ ।
क्योंकि मैं खुद एक लेखक हूँ ग़ज़ल कविताएं पटकथाएं कहानियां लिखना मेरा शौक है, सो मेरी पहली पसंद जिनके बारे में कुछ अनकही बातें मैं कहना चाहूंगा वो हैं श्री जावेद अख्तर साहब । इनके बारे में कुछ कहने से पहले कुछ और हस्तियों के बारे में बात करना में ज़रूरी समझता हूँ ।
         घटना उन दिनों की है जब हम दसवीं ग्याहरवीं कक्षा नें पढ़ा करते थे । सन था 1970-71 । बहुत से कलाकार फिल्मों में अपनी ऊंचाईयां बना चुके थे और कुछ बनाने में व्यस्त थे । उनमें से एक थे राजेश खन्ना साहब । उन्होंने 1969 से 1971 तक अपने फिल्मी carrier  की सबसे hit फिल्में फिल्मी जगत को दे चुके थे ।
     इसी बीच उन्होंने सुना राजेन्द्र कुमार साहब जो उस वक़्त की बुलंदियों को छू रहे थे अपना बंगला जिसका नाम उन्होंने अपनी बेटी के नाम पर रखा था "डिम्पल" बेच रहे हैं । क्योंकि राजेन्द्र जी अपने नए बंगले में शिफ्ट हो रहे थे ।
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राजेश खन्ना जी की अपनी फिल्म "हाथी मेरे साथी" में उन्होंने सलीम जावेद की जोड़ी को ब्रेक दिया।
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राजेश खन्ना जी उस वक़्त में खुद को उस वक़्त के बादशाह समझते थे । इसीलिए उस बंगले को खरीदने की ख़्वाहश रख दी । उस बंगले ने राजेन्द्र कुमार को बुलंदियां दी थी । राजेश खन्ना जी चाहते तो थे मगर कीमत को देख मन बैचैन हो उठा । 
उन्हीं दिनों एक south Indian producer ने एक 'हाथी' पर फ़िल्म offer ki. जिन्हें वो करना तो नहीं चाहते थे मगर उस बंगले को खरीदने के लिए पैसे की ज़रूरत थी । इसी खातिर खन्ना जी नेवो फ़िल्म accept कर ली ।
मगर उस फिल्म की स्क्रिप्ट को लेकर आश्वस्त नहीं थे ।
उन्होंने फिल्म के डायरेक्टर M A Thirumugam से इस बारे में बात की । अपनी शर्तों पर उस स्टोरी के Screen play writer की तलाश शुरू हुई ।
इसी बीच जावेद औऱ सलीम साहब की खन्ना जी से मुलाकात हुई ।
 but even after some rewrites, the script, involving elephants, didn’t offer anything meaningful to the him up to yet.
       In a bid to get something substantial, Khanna ji asked Salim Khan and Javed Akhtar to take a shot at Haathi Mere Saathi. They both were looking for independent credit too in those days.

Finally खन्ना जी offered them to write it's screenplay. उन्होंने कहा अगर उनको उनका स्क्रीनप्ले अच्छा लगा तो वो ओरों से ज़्यादा पैसा और शौहरत देंगे ।
फ़िल्म का original नाम "प्यार की दुनियाँ" से बदल कर "हाथी मेरे साथी" रखा गया, और ये फ़िल्म सुपर हिट हुई । इसी फिल्म से जावेद-सलीम की जोड़ी को ब्रेक मिला ।

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Sunday, July 8, 2018

आज सूना हो गया

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आज सूना हो गया दिल तेरे फिर* जाने के बाद,
सोचता हूँ होगा फिर क्या तेरे फिर आने के बाद ।

-------------------------हर्ष महाजन

*बदल

2122-2122-2122-212

Friday, May 4, 2018

क्यूँ न अश्कों का साथी बनूँ हमसफर

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क्यूँ न अश्कों का साथी बनूँ हमसफर,
जी रहा  बिन तेरे ज़िन्दगी का सफर ।
 आओ ठहरो तसव्वर में कुछ देर सँग,
हिज़्र कैसे सहूँ कैसे दूँ ये खबर ।

हर्ष महाजन
212/212/212/212

Thursday, March 1, 2018

आओ चढ़ा के रंग होली का मिला करें

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आओ चढ़ा के रंग.. होली... .का मिला करें,
दिल में जगा के प्यार को आओ...दुआ करें ।
नीला हो या पीला हो या हो रसंग अब लाल,
रिश्तों में सब मिला के नया सिलसिला करें ।

हर्ष महाजन


Wednesday, February 21, 2018

अटूट रिश्ता (नज़्म)

दोस्तो आपकी अदालत में एक नज़्म पेशे खिदमत है उम्मीद है इसे अपने प्यार से ज़रूर नवाजेंगे ।अगर अच्छी लगे तो दो शब्द ज़रूर कहियेगा ।

------------------अटूट रिश्ता (नज़्म)

वो दोस्ती का जज़्बा कभी दिखा न सका,
दुश्मन तो था मगर दुश्मनी निभा न सका ।

कुछ एक फसाने हकीकत में बदले ज़रूर,
मगर जलालत में कुछ भी वो बता न सका ।

इंतिहा-ए-जुदाई-ओ-गम सब सहे उसने,
पर समंदर जो आंखों में था छिपा न सका ।

नाम ले ले कर मेरा बहुत कोसा किये था वो
कितना पागल था नफरत भी जता न सका ।

टूटकर चाहेगा वो ऐसा कभी कहा था उसने,
वो शख्स, जैसा भी था मैं भी भुला न सका ।

-------------------हर्ष महाजन

Tuesday, February 20, 2018

यूँ न आंखों से बातें किया कीजिये


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यूँ न आँखों से बातें किया कीजिये,
इश्क़ का यूँ सबक न दिया कीजिये ।

हम तो नादान हैं प्यार में कुछ सनम,
तुम ख़बर कुछ तो दिल की लिया कीजिये ।

गम की ग़ज़लें चलें अश्क़ तुम थाम कर,
टूटे दिल को न यूँ ही सिया कीजिये ।

हम तो डरते हैं बदनामी से शह्र में,
ज़िक्र तुम इश्क का न किया कीजिये |


गम की गहराइयों से जो गुज़रो कभी,
इल्तिज़ा अश्क तुम न पिया कीजिये ।

फ़ासला दरमियाँ अब हमारे कहाँ,
फ़ासलों में सनम न ज़िया कीजिये ।

जब भी आँखों से टपके नशा प्यार का,
हम नज़र से पिलायें पिया कीजिये ।

----------------हर्ष महाजन

बहरे-मुतदारिक मसम्मन सालिम
212 212 212 212

1) मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र
जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया

2) हर तरफ़ हर ज़गह बेशुमार आदमी
फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी.

काश आज भी पुराना जमाना होता,


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काश आज भी......पुराना जमाना होता,
तुझ संग मेरा भी....इक अफसाना होता ।
कुछ भी बदल लेते..हाथों की लकीरों में,
पर ज़िन्दगी का सफर खूब सुहाना होता ।

----------------हर्ष महाजन

Monday, February 19, 2018

इश्क़ तक तुझे तैयार करूँ ज़ायज़ नहीं लगता


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इश्क़ तक तुझे तैयार करूँ ज़ायज़ नहीं लगता,
अनचाहा फिर खुमार भरूँ ज़ायज़ नहीं लगता ।
चाहत तो है तेरे हुस्न का दीदार कर लूँ मगर,
दहलीज़ पे इंतज़ार करूँ...ज़ायज़ नहीं लगता ।

----------------हर्ष महाजन

हद से ज़्यादा प्यार करना भी गुनाह हो गया


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हद से ज़्यादा प्यार करना भी गुनाह हो गया,
वो रिश्ता कुछ यूं बना कि घर तबाह हो गया ।

------------------------हर्ष महाजन