Tuesday, May 7, 2013

किस अहाते मे कदम रख के चलते हो

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किस अहाते मे कदम रख के चलते हो ,
खुद ही शर्त रखते हो फिर खुद हँसते हो |
कैसे भूल जाएँ वो शब-ओ-रोज़ की बातें,
प्यार भी करते हो फिर तन्हा तड़पते हो |

__________________हर्ष महाजन