Thursday, October 4, 2012

कभी नगमों में मुझे उसने पुकारा होगा

...

कभी नगमों में मुझे उसने पुकारा होगा,
कभी माटी पर मेरा नाम उकारा होगा |

बे-वफ़ा होके भी जो फूल गिरह में बाँधा,
बड़ी मुश्किल से मुझे दिल से उतारा होगा |

उसकी आँखों में निहाँ संग-संग बीता सफ़र
ऐसे हालातों में अब कैसे किनारा होगा |

दर्द महसूस करे ऐसा हुनर है उसमे
उसके दिल में मेरी तल्खी का पिटारा होगा |

कितना अब शोर हवाओं में मगर 'हर्ष' कहाँ
उसने शायद अपनी मैयत से पुकारा होगा |

___________हर्ष महाजन |